New Labour Laws Gratuity 2025: जानिए नए लेबर कोड में ग्रेच्युटी से जुड़े बदलाव, 1 साल में ग्रेच्युटी नियम, फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के फायदे, गणना का तरीका और पूरी जानकारी।”
भारत में कर्मचारियों की सुरक्षा और उनके वित्तीय अधिकारों को मज़बूत बनाने के लिए सरकार ने हाल ही में श्रम कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं। नए लेबर कोड 2025 के लागू होने के साथ ही ग्रेच्युटी के नियम भी काफी बदल चुके हैं। पहले जहाँ ग्रेच्युटी को एक लंबी सेवा के इनाम के रूप में देखा जाता था, अब यह आधुनिक रोजगार ढांचे के अनुरूप ज्यादा लचीली, पारदर्शी और कर्मचारियों के पक्ष में बनाई गई है।
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ग्रेच्युटी क्या है? (What is New Labour Laws Gratuity 2025 in Hindi)
ग्रेच्युटी वह धनराशि है जो किसी कर्मचारी को उसकी लंबी सेवा, निष्ठा और योगदान के बदले दी जाती है। यह राशि नियोक्ता द्वारा नौकरी छोड़ने, सेवानिवृत्ति, स्वास्थ्य कारणों या मृत्यु की स्थिति में दी जाती है।
सरल भाषा में कहें तो—
ग्रेच्युटी वह “धनात्मक धन्यवाद” है जो कंपनी कर्मचारी को उसकी सेवा के सम्मान में देती है।
पहले यह लाभ केवल स्थायी कर्मचारियों को मिलता था और इसके लिए कम से कम 5 साल की निरंतर सेवा ज़रूरी होती थी।
लेकिन नए लेबर लॉ आने के बाद इसमें बड़ा सुधार किया गया है।
नए लेबर लॉ 2025 में ग्रेच्युटी के सबसे बड़े बदलाव
21 नवंबर 2025 से लागू होने वाले नए श्रम कानूनों में ग्रेच्युटी से जुड़े कई अहम अपडेट शामिल हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं।
1. फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल में ग्रेच्युटी का अधिकार
यह नया बदलाव सबसे बड़ा और सबसे उपयोगी है।
पहले:
- फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी 5 साल की सेवा पूरी किए बिना ग्रेच्युटी के पात्र नहीं थे।
अब:
- सिर्फ 1 साल काम करने पर भी फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को ग्रेच्युटी मिलेगी।
यह फैसला उन सेक्टर्स के लिए क्रांतिकारी साबित होगा जहाँ प्रोजेक्ट-बेस्ड या टेंपरेरी नौकरी होती है—जैसे IT, मीडिया, कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और एजुकेशन सेक्टर।
इस बदलाव के फायदे:
- नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों को भी लाभ
- प्रोजेक्ट खत्म होने पर आर्थिक सुरक्षा
- फिक्स्ड-टर्म और स्थायी कर्मचारियों के बीच समान अधिकार
- युवाओं और गिग वर्कर्स को ज्यादा सुरक्षा
2. स्थायी कर्मचारियों के लिए 5 साल की शर्त वहीं लागू
नया कानून केवल फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए बदला है।
स्थायी या परमानेंट कर्मचारियों के लिए 5 साल की निरंतर सेवा की शर्त पहले की तरह लागू है।
हालाँकि, “निरंतर सेवा” को अब ज्यादा लचीले तरीके से परिभाषित किया गया है:
यदि कर्मचारी इस कारणों से अनुपस्थित है, तो इसे “सेवा में बाधा” नहीं माना जाएगा—
- मेडिकल लीव
- प्रेग्नेंसी / मातृत्व अवकाश
- कंपनी स्ट्राइक / लॉकडाउन
- प्राकृतिक आपदा
- संगठनात्मक कारणों से छुट्टी
3. ग्रेच्युटी की टैक्स-फ्री सीमा अभी भी ₹20 लाख
नए कोड में सरकार ने ग्रेच्युटी की टैक्स-फ्री लिमिट को ₹20,00,000 रखा है।
यह बड़ी रकम किसी भी कर्मचारी के लिए सेवानिवृत्ति या नौकरी छोड़ने के समय काफी सहायक साबित होती है।
साथ ही यह प्रावधान किया गया है कि—
सरकार भविष्य में जरूरत पड़ने पर इस सीमा को बिना नया कानून पास किए बढ़ा सकती है।
4. ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ग्रेच्युटी क्लेम
नए लेबर कोड का एक आधुनिक और बड़ा फ़ायदा है—
डिजिटल क्लेम प्रक्रिया।
अब कर्मचारी अपना ग्रेच्युटी दावा ऑनलाइन कर सकते हैं:
- एक केंद्रीकृत पोर्टल पर
- दस्तावेज़ अपलोड करके
- रियल-टाइम ट्रैकिंग की सुविधा के साथ
नियोक्ताओं द्वारा भुगतान में देरी होने पर उन पर ब्याज और जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।
इससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ती है।
5. ग्रेच्युटी का फॉर्मूला कैसे बदलता है?
गणना का मूल फॉर्मूला वहीं है:
ग्रेच्युटी = (अंतिम बेसिक सैलरी + DA) × (15 / 26) × कुल सेवा वर्ष
लेकिन नए कोड में:
- फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को “1 साल” भी पूरा माना जाएगा,
- जबकि प्रोजेक्ट अवधि या अनुबंध अवधि बिल्कुल स्पष्ट रूप से “सेवा वर्ष” में शामिल की जाएगी।
नई ग्रेच्युटी प्रणाली से किसे क्या लाभ मिलेगा?
यह बदलाव कई तरह के कर्मचारियों को लाभ देगा:
1. प्रोजेक्ट-बेस्ड कर्मचारी
जिनका अनुबंध अक्सर 1–2 साल का होता है, उन्हें पहले कभी ग्रेच्युटी नहीं मिलती थी। अब मिलेगी।
2. युवाओं और फ्रेशर्स को
जो अक्सर नौकरी बदलते हैं, उन्हें हर छोटी नौकरी से भी कुछ वित्तीय लाभ प्राप्त होगा।
3. महिला कर्मचारी
मातृत्व अवकाश “निरंतर सेवा” में शामिल होने से विशिष्ट सुरक्षा मिलेगी।
4. उद्योग–व्यापार
फिक्स्ड-टर्म कर्मचारी अब अधिक प्रेरित और स्थिर रहेंगे।
5. नियोक्ता और HR विभाग
स्पष्ट नियम होने से भर्ती और रोजगार नीति बनाना आसान होगा।
नए लेबर लॉ में ग्रेच्युटी के लाभ (Advantages)
- आर्थिक सुरक्षा बढ़ती है
- रोजगार अस्थिरता का असर कम होता है
- कर्मचारियों में विश्वास बढ़ता है
- कंपनियों की पारदर्शिता मजबूत होती है
- टेंपरेरी जॉब में भी लाभ मिलने से युवा कार्यबल को प्रोत्साहन मिलता है
- डिजिटल क्लेम प्रक्रिया से देरी कम होगी
ग्रेच्युटी नियमों की सीमाएँ (Limitations)
- स्थायी कर्मचारियों के लिए अभी भी 5 साल की शर्त बनी हुई है
- छोटे व्यवसायों के लिए अनुपालन (Compliance) थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है
- डिजिटल प्रणाली का उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में कठिन हो सकता है
- नियोक्ता-कर्मचारी विवादों की संभावना बनी रहेगी
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निष्कर्ष (Conclusion)
नए लेबर लॉ 2025 में ग्रेच्युटी से जुड़े बदलाव भारतीय कर्मचारियों के लिए एक बड़ा कदम हैं।
यह सुधार फिक्स्ड-टर्म, प्रोजेक्ट-बेस्ड और युवाओं जैसे लाखों कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा। इसके साथ-साथ डिजिटल क्लेम प्रक्रिया और निरंतर सेवा की नई परिभाषा भविष्य में ग्रेच्युटी को अधिक आसान, पारदर्शी और सुलभ बनाएगी।