Khatu Shyam Ji: खाटू श्याम जी राजस्थान के सीकर जिले में स्थित एक प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। हर साल लाखों भक्त यहाँ दर्शन के लिए पहुँचते हैं। अगर आप पहली बार खाटू जाने की योजना बना रहे हैं, तो मै आपको इस ब्लोग के माध्यम से सारी जानकारी आपको बताउंगा। यहाँ आपको यात्रा से लेकर रुकने, खाने, दर्शन तक की पूरी जानकारी सरल भाषा में देने वाला हूँ।

Table of Contents
1. खाटू श्याम जी (Khatu Shyam Ji) का परिचय
भगवान श्री कृष्णा के कलयुगी अवतार खाटू श्याम जी करोड़ों लोगों के दिल में बसे हुए हैं। श्याम बाबा की एक झलक पानी के लिए श्रद्धालु कई किलोमीटर दूर से पैदल चलकर आते हैं। महाभारत की युद्ध भूमि में अपना शीश काटकर श्री कृष्णा जी को दान देने वाले बर्बरीक की जो की राजस्थान की शिकार जिले के खाटू गांव में खाटू श्याम जी के नाम से जाने जाते हैं।
श्याम बाबा के भव्य मंदिर में दर्शन करने के लिए हर दिन लाखों भक्त खाटू में आते हैं और जो भी भक्त पुरी आस्था के साथ यहां आते हैं श्याम बाबा उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं, कहते हैं कि जब आप हर जगह से हार जाए तो एक बार खाटू श्याम जी के मंदिर में जरूर जाए। यहां पर दर्शन करने से आपके सभी बिगड़े काम बन जाते हैं। जैसे-जैसे कलयुग आगे बढ़ रहा है वैसे ही श्याम बाबा के भक्त भी बढ़ते जा रहे हैं, जो कोई भी खाटू श्याम जी को दिल से अपना मान लेता है खाटू नरेश उसके सारे कष्ट हर लेते हैं।
2. महाभारत से जुड़ी कथा – बर्बरीक का शीश दान
2.1 बर्बरीक का वीरत्व
- बर्बरीक घटोत्कच और अहिलावती के पुत्र थे।
- बर्बरीक बचपन से अद्भुत योद्धा एवं महान धनुर्धर थे।
- इन्हे तीन बाण प्राप्त थे, जिससे ये तीनों लोक जीत सकते थे।
2.2 युद्ध में भाग लेने की इच्छा
कौरव-पांडव युद्ध से पहले बर्बरीक युद्ध में शामिल होना चाहते थे।
उन्होंने अपनी माता से अनुमति मांगी – और दो वचन दिए:
- वे हमेशा हारने वाले का साथ देंगे
- उनसे जो भी दान मांगेगा, उसे कभी मना नहीं करेंगे
2.3 बर्बरीक की परीक्षा
- श्री कृष्ण ने ब्राह्मण के वेश धारण कर बर्बरीक की परीक्षा ली
- श्री कृष्णा ने कहा कि यह जो वृक्ष है इसके सारे पत्तों को एक ही तीर से छेद दो तो मैं मान जाऊंगा
- बर्बरीक ने एक तीर से वृक्ष के सभी पत्तों को भेद दिया
- श्री कृष्ण के पैर तले छिपा पत्ता भी भेदने की क्षमता दिखाई
- तब बर्बरीक ने पूछा कि आप कोई साधारण ब्राह्मण नहीं हैं, अपना परिचय दीजिए
- तब जाके श्री कृष्ण ने अपने असली रूप में आये
2.4 शीश दान
अंत मे श्री कृष्ण ने दान मे बर्बरीक का शीश मांगा। बर्बरीक ने प्रसन्नता से अपना शीश दे दिया।
श्री कृष्ण ने वरदान दिया:
“कलयुग मे तुम श्याम नाम से पूजे जाओगे और हारे का सहारा कहलाओगे।”
3. खाटू श्याम जी (Khatu Shyam Ji) के मंदिर का इतिहास

- मूल मंदिर सन 1027 ई. में राजा रूप सिंह चौहान और उनकी पत्नी नर्मदा कंवर ने बनवाया
- खाटू गाँव में ही बर्बरीक का शीश जमीन से मिला
- कार्तिक एकादशी को शीश मंदिर मे विराजमान किया जाता है
- फाल्गुन मेले मे करोड़ों भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं।
4. खाटू श्याम जी (Khatu Shyam Ji) कैसे पहुँचें?
4.1 ट्रेन से यात्रा
सबसे नज़दीकी स्टेशन है:
रिंगस जंक्शन (16–18 किमी दूर)

- स्टेशन के बाहर से खाटू के लिए जीप/टैक्सी मिल जाती है
- किराया: लगभग ₹50
अगर रिंगस की सीधी ट्रेन न मिले:
जयपुर जंक्शन पहुँचे
- यहाँ से सिंधी कैंप बस स्टैंड मात्र 1 किमी
- मेट्रो/रिक्शा से आसानी से पहुंचा जा सकता है
4.2 बस से यात्रा (जयपुर → खाटू)
- राजस्थान रोडवेज बसें
- स्पेशल प्राइवेट नॉन-AC/AC बसें
- किराया:
- रोडवेज: ₹100 (लगभग)
- प्राइवेट नॉन-AC: ₹100
- प्राइवेट AC: ₹120
- दूरी: 80 किमी
- समय: 2 घंटे
4.3 खाटू बस स्टैंड से मंदिर तक
- बस स्टैंड से मंदिर लगभग 1 किमी
- सबसे पहले बड़ा तोरण द्वार दिखाई देता है
5. खाटू श्याम जी (Khatu Shyam Ji) के प्रमुख स्थल
5.1 तोरण द्वार

फाल्गुन मेले में यहीं से भक्त निशान यात्रा करते हुए 18 किमी पैदल पहुँचते हैं।
5.2 प्रसाद की दुकानें
आप यहाँ पा सकते हैं:
- मिश्री
- पेड़ा
- चूरमा
- गुलाब के फूल
5.3 श्याम कुंड
- दर्शन से पहले सभी भक्त यहाँ स्नान करते हैं
- मान्यता: श्याम कुंड में स्नान से रोग दूर होते हैं
- इसी कुंड के पास से बर्बरीक का शीश मिला था
5.4 प्राचीन श्याम कुंड

- बहुत कम लोग जानते हैं
- पानी नए कुंड तक यहीं से पहुँचता है
- अवश्य दर्शन करें
6. मंदिर में दर्शन कैसे करें?
- बैरिकेड की सबसे पहली लाइन में खड़े होने से नज़दीक दर्शन मिलते हैं
- भीड़ के समय 30–35 किमी तक लंबी लाइन तक बनती है
7. खाटू में भोजन व ठहरने की सुविधा
7.1 खाने-पीने के विकल्प
- ₹100 में वेज थाली
- मिष्ठान भंडार:
- रबड़ी
- चूरमा
- मावा
- कचौड़ी
7.2 रहने की व्यवस्था
तोरण द्वार के पास:
- कई धर्मशालाएँ
- नॉन-AC कमरे
- परिवार के लिए कमरे उपलब्ध
8. यात्रा के दौरान ध्यान देने योग्य बातें
- भीड़ में अपनी जेब और मोबाइल संभालकर रखें
- प्रसाद दुकान से रिसीट अवश्य लें
- पानी साथ रखें
- बच्चे हाथ से न छोड़ें
- मंदिर के अंदर वीडियो न बनाएं